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पत्र
पत्र..
एक साधन
जो जोड़ता है दो दिलों को,
बनाता है उस लड़ी को।
अधूरी पड़ी
उन रिश्तों की डोर को
थाम कर
जो हैं बहुत दूर-दूर,
उन सभी को साथ ले,
हर तरह के रंगों को
अपने में समेटे
किसी की खुशी,
किसी के आँसू
अपने में लपेटे,
हवा के साये सा
उड़ कर आता है,
पास हमारे।
देने को संदेश उन सभी का
जो बैठे हैं हमारे
दूर कहीं हमसे।
बनके खुद साथी उनका,
बनके एक साथी हमारा,
हर पल, प्रतिक्षण,
कोई न कोई रहता है गुम,
किसी के ख्याल में,
किसी की चाह में।
होगी कोई माँ भी
कहीं दूर उदास,
होगी उसे भी अपने बेटे के
खत की आस।
सूनी आँखों में आँसुओं के मोती
नित्य सजाती होगी,
अपने बुढापे को
दरवाजे की चैखट पर बिताती होगी।
तो गुम होगी कहीं कोई
अपने प्रियतम की याद में,
सूनी रात की काली तन्हाई से
घबराती होगी,
झिलमिल तारों के बीच
सजे चाँद में
अपने प्रियतम का चेहरा बनाती होगी।
ऐसा ही एक इन्तजार
हमें भी है,
न किसी खास का,
न किसी यार का,
न किसी प्रेम का,
न किसी प्रियतम का,
वो खत हमें
बहार ने लिखा होगा,
होगी उसमें खबर
फसल प्यार की उगने की,
महक स्नेह और अमन के
फैलने की,
करवायेगा वो खत मुलाकात
हमारे भाइयों से,
जो अब
लड़ न रहे होंगे
राम-रहीम के नाम पर।
गोलियों की गूँज और
अपनों की चीखों की जगह
नदियों की कल-कल,
पक्षियों का कलरव होगा।
वही प्यारा चमन,
वही सुहाना वतन होगा।
बस हमें तो हर पल
इसी खत का इन्तजार है,
महज इन्तजार, वर्षों का इन्तजार
कि कब समय हमारी भी सुधि लेगा?
कब हमें अपनी खबर भेजेगा?
हर पल बस यही आस है
कि कभी तो मेरा खत आयेगा,
आज नहीं तो
कल तो अवश्य ही आयेगा।
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36 - अंधानुकरण
37 - अन्तर
38 - वृद्धावस्था
39- जीवन-चक्र
40- आज का युवा
41-करो निश्चय
42- ज़िन्दगी के लिए
43- घर
44- अनुभूति
45- कलम की यात्रा
46- सुखों का अहसास
47- कहाँ आ गए हैं
48- किससे कहें...
49- आने वाले कल के लिए
50- तुम्हारा अहसास
51- दिल के करीब
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