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अकाट्य सत्य
मृत्यु
इस जीवन का अकाट्य सत्य है,
जीवन के
तमाम पड़ावों की,
अनेक उतार-चढ़ावों की
मंजिल है।
ठहराव है
मानव के भागते कदमों का,
अतृप्त अभिलाषाओं का।
एक ऐसा सत्य
जो कभी भी, अनजाने में
दर्शाता है अपनी सत्यता,
दिखाता है मानव को
उसकी असहायता।
फिर भी
संसार की नश्वरता के बीच
मानव लगा है झुठलाने को
इस अकाट्य सत्य को,
झुठला रहा है पर
अपने आपको।
मिटा रहा है
अपने अस्तित्व को,
लगा है फिर भी
पूरे जी-जान से,
जीतने को इस सत्य को,
जीवन की नश्वरता को।
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संग्रह की समस्त कवितायेँ
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04 - इच्छाएँ
05 - बचपन की बेबसी
06 - सत्यता
07 - श्मशान
08 - कुदरत की रचना
09 - नारी के विविध रूप
10 - मानव
11 - याद तुम्हारी
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39- जीवन-चक्र
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41-करो निश्चय
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47- कहाँ आ गए हैं
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